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mahabharat 3.307.19-20: कुन्ती बोली - प्रभु! यदि आप मेरे गर्भ से जिस पुत्र को जन्म देंगे, उसके कुण्डल और कवच अमृतमय हों, तो हे प्रभु! आपने जैसा कहा है, उसी रूप में मेरा आपसे मिलन हो। आपका वह पुत्र आपके समान ही बल, रूप, धैर्य, तेज और गुणों से युक्त हो।॥19-20॥   |   mahabharat अध्याय 3.307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  3.307.19-20 
कुन्त्युवाच
यद्येतदमृतादस्ति कुण्डले वर्म चोत्तमम्।
मम पुत्रस्य यं वै त्वं मत्त उत्पादयिष्यसि॥ १९॥
अस्तु मे सङ्गमो देव यथोक्तं भगवंस्त्वया।
त्वद्वीर्यरूपसत्त्वौजा धर्मयुक्तो भवेत् स च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती बोली - प्रभु! यदि आप मेरे गर्भ से जिस पुत्र को जन्म देंगे, उसके कुण्डल और कवच अमृतमय हों, तो हे प्रभु! आपने जैसा कहा है, उसी रूप में मेरा आपसे मिलन हो। आपका वह पुत्र आपके समान ही बल, रूप, धैर्य, तेज और गुणों से युक्त हो।॥19-20॥
 
Kunti said - Prabhu! If the earrings and armor of the son whom you will give birth to from my womb are made of nectar, then Lord! Let me have union with you in the same form as you have said. That son of yours should be endowed with the same strength, beauty, patience, energy and virtue as you.॥ 19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)