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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 306: कुन्तीके द्वारा सूर्यदेवताका आवाहन तथा कुन्ती-सूर्य-संवाद  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.306.6 
तस्या दृष्टिरभूद् दिव्या सापश्यद् दिव्यदर्शनम्।
आमुक्तकवचं देवं कुण्डलाभ्यां विभूषितम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस समय उनकी दृष्टि दिव्य हो गई। उन्होंने भगवान सूर्य की ओर देखा जो दिव्य रूप में प्रकट हुए थे। उन्होंने कवच और कुण्डल धारण किए हुए थे।
 
At that time his sight became divine. He looked at Lord Surya who appeared in a divine form. He was wearing armour and adorned with earrings. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)