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mahabharat 3.306.28: अतः तुम मेरे साथ समागम करो। तुम्हें मेरे समान पुत्र प्राप्त होगा और तुम सम्पूर्ण जगत् में विशेष मानी जाओगी; इसमें कोई संदेह नहीं है॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 3.306: कुन्तीके द्वारा सूर्यदेवताका आवाहन तथा कुन्ती-सूर्य-संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 306: कुन्तीके द्वारा सूर्यदेवताका आवाहन तथा कुन्ती-सूर्य-संवाद  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.306.28 
सा त्वं मया समागच्छ लप्स्यसे मादृशं सुतम्।
विशिष्टा सर्वलोकेषु भविष्यसि न संशय:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम मेरे साथ समागम करो। तुम्हें मेरे समान पुत्र प्राप्त होगा और तुम सम्पूर्ण जगत् में विशेष मानी जाओगी; इसमें कोई संदेह नहीं है॥ 28॥
 
Therefore, you should have sexual intercourse with me. You will get a son like me and will be considered special (among other women) in the whole world; there is no doubt about this.॥ 28॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि कुण्डलाहरणपर्वणि सूर्याह्वाने षडधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३०६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत कुण्डलाहरणपर्वमें सूर्यका आवाहनविषयक तीन सौ छठाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)