vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 304: कुन्तीका पितासे वार्तालाप और ब्राह्मणकी परिचर्या
»
श्लोक 4
श्लोक
3.304.4
लाभो ममैष राजेन्द्र यद् वै पूजयती द्विजान्।
आदेशे तव तिष्ठन्ती हितं कुर्यां नरोत्तम॥ ४॥
अनुवाद
राजन! हे पुरुषश्रेष्ठ! मुझे बहुत लाभ होगा कि मैं आपकी आज्ञा में रहकर ब्राह्मणों की सेवा करूँ और सदैव आपका हित करूँ॥4॥
King! O best of men! It will be of great benefit to me that I remain under your command and serve the Brahmins and always do good to you. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×