Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.302.15: तुम उससे कहो, ‘सहस्राक्ष! मैं तुम्हें अपने शरीर का उत्तम कवच और दोनों कुण्डल दूँगा, किन्तु तुम मुझे अपनी अमोघ शक्ति भी दो, जो शत्रुओं का नाश करने वाली है।’॥15॥ | mahabharat अध्याय 3.302: सूर्य-कर्ण-संवाद, सूर्यकी आज्ञाके अनुसार कर्णका इन्द्रसे शक्ति लेकर ही उन्हें कुण्डल और कवच देनेका निश्चय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अमोघां देहि मे शक्तिममित्रविनिबर्हिणीम्।
दास्यामि ते सहस्राक्ष कुण्डले वर्म चोत्तमम्॥ १५॥
अनुवाद
तुम उससे कहो, ‘सहस्राक्ष! मैं तुम्हें अपने शरीर का उत्तम कवच और दोनों कुण्डल दूँगा, किन्तु तुम मुझे अपनी अमोघ शक्ति भी दो, जो शत्रुओं का नाश करने वाली है।’॥15॥
You say to him, 'Sahasraksha! I will give you the best armour of my body and both the earrings, but you also give me your infallible power, which can destroy the enemies.'॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥