श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.300.18 
यदि दास्यसि कर्ण त्वं सहजे कुण्डले शुभे।
आयुष: प्रक्षयं गत्वा मृत्योर्वशमुपैष्यसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! यदि तू अपने साथ उत्पन्न हुए इन सुन्दर कुण्डलों को इन्द्र को दे देगा, तो तेरी आयु कम हो जाएगी और तू मृत्यु को प्राप्त हो जाएगा॥ 18॥
 
Karna! If you give these beautiful earrings, which were born with you, to Indra, your lifespan will be shortened and you will be subject to death.॥ 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas