vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 30: दु:खसे मोहित द्रौपदीका युधिष्ठिरकी बुद्धि, धर्म एवं ईश्वरके न्यायपर आक्षेप
»
श्लोक 22
श्लोक
3.30.22
धातैव खलु भूतानां सुखदु:खे प्रियाप्रिये।
दधाति सर्वमीशान: पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरन्॥ २२॥
अनुवाद
सृष्टिकर्ता ईश्वर ही सबके पूर्वकर्मों के अनुसार जीवों के लिए सुख-दुःख, रुचि-अरुचि की व्यवस्था करता है ॥22॥
It is God the creator who arranges happiness-sorrow, like-dislike for the living beings according to everyone's previous deeds. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×