vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना
»
श्लोक 37
श्लोक
3.298.37
मृत्युर्मे पत्युराख्यातो नारदेन महात्मना।
स चाद्य दिवस: प्राप्तस्ततो नैनं जहाम्यहम्॥ ३७॥
अनुवाद
महात्मा नारदजी ने मुझे मेरे पति की मृत्यु के बारे में बताया था। आज उनकी मृत्यु का दिन आ गया था; इसलिए मैंने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। 37.
Mahatma Naradji had told me about my husband's death. That day of death had come today; that is why I did not leave him alone. 37.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×