सावित्र्युवाच
एवमेतद् यथा वेत्थ संकल्पो नान्यथा हि व:।
न हि किंचिद् रहस्यं मे श्रूयतां तथ्यमेव यत्॥ ३६॥
अनुवाद
सावित्री बोली - मुनीश्वर! आप जो उचित समझें, वही उचित है। आपका निर्णय अन्यथा नहीं हो सकता। मेरे लिए छिपाने को कुछ भी नहीं है। मैं आपको सारा घटनाक्रम विस्तारपूर्वक बताऊँगी, कृपया सुनें।
Savitri said - Munishwar! Whatever you think is right. Your decision cannot be otherwise. There is nothing for me to hide. I will tell you all the events in detail, please listen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥