शैब्या च सत्यवांश्चैव सावित्री चैकत: स्थिता:।
सर्वैस्तैरभ्यनुज्ञाता विशोका: समुपाविशन्॥ २६॥
अनुवाद
शैब्य, सत्यवान और सावित्री- ये तीनों भी एक ओर खड़े थे, जो उन सब महापुरुषों की आज्ञा पाकर बिना किसी शोक के बैठ गये।
Shaibya, Satyavan and Savitri - these three were also standing on one side, who after getting the permission of all those great men sat down without any grief. 26.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥