श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.298.22 
ब्राह्मणा ऊचु:
पुत्रेण संगतं त्वां तु चक्षुष्मन्तं निरीक्ष्य च।
सर्वे वयं वै पृच्छामो वृद्धिं वै पृथिवीपते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मणों ने कहा, "महाराज! आपका अपने पुत्र से मिलन हो गया है और आपकी दृष्टि भी पुनः आ गई है। आपको इस अवस्था में देखकर हम सभी आपके जन्म का उत्सव मना रहे हैं।"
 
Then the brahmins said, "Maharaj! You have been united with your son and have also regained your sight. Seeing you in this state, we all are celebrating your birth."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)