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mahabharat 3.298.16: भारद्वाज ने कहा, 'यह देखकर कि सत्यवान की पत्नी सावित्री तप, संयम और सदाचार से संपन्न है, मैं कह सकता हूं कि सत्यवान जीवित है।'   |   mahabharat अध्याय 3.298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.298.16 
भारद्वाज उवाच
यथास्य भार्या सावित्री तपसा च दमेन च।
आचारेण च संयुक्ता तथा जीवति सत्यवान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज ने कहा, 'यह देखकर कि सत्यवान की पत्नी सावित्री तप, संयम और सदाचार से संपन्न है, मैं कह सकता हूं कि सत्यवान जीवित है।'
 
Bharadwaj said, 'Seeing that Satyavan's wife Savitri is endowed with austerity, self-control and good conduct, I can say that Satyavan is alive.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)