श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 99-100h
 
 
श्लोक  3.297.99-100h 
न स्मराम्युक्तपूर्वं वै स्वैरेष्वप्यनृतां गिरम्॥ ९९॥
तेन सत्येन तावद्य ध्रियेतां श्वशुरौ मम।
 
 
अनुवाद
मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने पूर्वकाल में कभी भी, यहाँ तक कि अपनी इच्छानुसार मौज-मस्ती और खेल-कूद में भी झूठ बोला हो। उसी सत्य के प्रभाव से मेरे सास-ससुर इस समय जीवित हैं॥99 1/2॥
 
‘I do not remember having ever told a lie in the past, even during the fun and games that I did at will. Due to the effect of that truth, my father-in-law and mother-in-law are alive at this time.॥ 99 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)