श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.297.92 
अहं च संशयं प्राप्त: कृच्छ्रामापदमास्थित:।
मातापितृभ्यां हि विना नाहं जीवितुमुत्सहे॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
मैं भी कठिन परिस्थिति में फँसा हुआ हूँ और अपने जीवन के प्रति संशय में हूँ। माता-पिता के बिना मैं कभी जीवित नहीं रह सकता॥ 92॥
 
I too am trapped in a difficult situation and am in a state of doubt about my life. I can never survive without my parents.॥ 92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)