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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान
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श्लोक 91
श्लोक
3.297.91
निद्रायाश्चाभ्यसूयामि यस्या हेतो: पिता मम।
माता च संशयं प्राप्ता मत्कृतेऽनपकारिणी॥ ९१॥
अनुवाद
मैं अपनी इस निद्रा को धिक्कारता हूँ, जिसके कारण मेरे पिता और माता का जीवन, जिन्होंने कभी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ा, संदेह में है ॥91॥
I curse this sleep of mine, because of which the life of my father and my mother, who never harmed me, is in doubt. ॥91॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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