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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान
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श्लोक 89
श्लोक
3.297.89
वृद्धयोरन्धयोर्दृष्टिस्त्वयि वंश: प्रतिष्ठित:।
त्वयि पिण्डश्च कीर्तिश्च संतानं चावयोरिति॥ ८९॥
अनुवाद
हम दोनों वृद्ध और अंधे हैं। आप ही हमारी दृष्टि हैं और हमारा वंश आप पर ही आधारित है। हम दोनों का धन, यश और वंश आप पर ही निर्भर है। 89॥
‘We are both old and blind. You are our vision and our lineage is based on you. The wealth, fame and lineage of both of us depend on you only. 89॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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