श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.297.87 
पुरा मामूचतुश्चैव रात्रावस्रायमाणकौ।
भृशं सुदु:खितौ वृद्धौ बहुश: प्रीतिसंयुतौ॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
बहुत समय पहले की बात है, मेरे वृद्ध माता-पिता बहुत दुःखी थे और रात्रि में आँसू बहाते हुए मुझसे बार-बार प्रेमपूर्वक कहते थे -॥87॥
 
Long ago, my aged parents were very sad and shedding tears at night, they said to me lovingly again and again -॥ 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)