श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  3.297.86 
का त्ववस्था तयोरद्य मदर्थमिति चिन्तये।
तयोरदृश्ये मयि च महद् दु:खं भविष्यति॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
आज मेरी वजह से उन पर क्या बीती होगी? ये सोचकर मैं बहुत परेशान हूँ। अगर वो मुझे न देख पाएँ तो उन्हें बहुत दुख होगा। 86.
 
What must have happened to them today because of me? I am very worried thinking about this. They will be very sad if they don't see me. 86.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)