श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  3.297.85 
मात्रा पित्रा च सुभृशं दु:खिताभ्यामहं पुरा।
उपालब्धश्च बहुशश्चिरेणागच्छसीति ह॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
मेरे माता-पिता बहुत दुखी हैं और उन्होंने मुझे कई बार डांटा है और कहा है, 'तुम देर से घर आते हो।'
 
My parents have been very sad and have rebuked me many times saying, 'You come home late'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)