श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.297.82 
सत्यवानुवाच
शिरोरुजा निवृत्ता मे स्वस्थान्यङ्गानि लक्षये।
मातापितृभ्यामिच्छामि संगमं त्वत्प्रसादजम्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
सत्यवान बोला - प्रिये! मेरे सिर का दर्द दूर हो गया है। मेरे शरीर के सभी अंग स्वस्थ दिखाई दे रहे हैं। अब आपके आशीर्वाद से मैं अपने माता-पिता से मिलना चाहता हूँ। 82.
 
Satyavan said - Dear! My head pain has gone away. All my body parts look healthy to me. Now with your blessings I want to meet my parents. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)