सत्यवानुवाच
वनं प्रतिभयाकारं घनेन तमसाऽऽवृतम्।
न विज्ञास्यसि पन्थानं गन्तुं चैव न शक्ष्यसि॥ ७७॥
अनुवाद
सत्यवान बोले - प्रिये! यह वन घोर अंधकार से आच्छादित है और अत्यंत डरावना प्रतीत होता है। इस समय न तो तुम्हें मार्ग दिखाई देगा और न ही तुम चल सकोगे।
Satyavan said - Dear! This forest is covered in thick darkness and looks very scary. At this time you will neither be able to see the way nor will you be able to walk.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥