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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान
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श्लोक 76
श्लोक
3.297.76
एता घोरं शिवा नादान् दिशं दक्षिणपश्चिमाम्।
आस्थाय विरुवन्त्युग्रा: कम्पयन्त्यो मनो मम॥ ७६॥
अनुवाद
‘दक्षिण और पश्चिम दिशा की ओर जाकर ये उग्र मादा सियारें भयंकर आवाजें निकाल रही हैं, जिन्हें सुनकर मेरा हृदय कांप रहा है।
‘Going in the direction of the south and west these furious female jackals are making terrifying noises, which make my heart tremble.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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