श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  3.297.75 
नक्तंचराश्चरन्त्येते हृष्टा: क्रूराभिभाषिण:।
श्रूयन्ते पर्णशब्दाश्च मृगाणां चरतां वने॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
ये क्रूर-जीभ वाले निशाचर जीव यहाँ सुखपूर्वक विचरण कर रहे हैं। जब वे वन में विचरण करने वाले हिरणों के चरणों को छूते हैं, तो पत्तों की सरसराहट सुनाई देती है। 75.
 
These cruel-tongued nocturnal creatures are roaming around happily here. The rustling sound of the leaves can be heard when they touch the feet of the deer roaming in the forest. 75.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)