श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.297.71 
त्वयोपगूढस्य च मे निद्रयापहृतं मन:।
ततोऽपश्यं तमो घोरं पुरुषं च महौजसम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
'जब आपके शरीर ने मुझे स्पर्श किया, तो मेरा मन सो गया। उसके बाद मैंने पूर्ण अंधकार देखा। साथ ही, मैंने एक दिव्य पुरुष को भी देखा जो अत्यंत तेजस्वी था।' 71.
 
‘My mind fell asleep when your body touched me. After that I saw complete darkness. Along with that I saw a divine person who was extremely radiant. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)