श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.297.7 
तत: सा नारदवचो विमृशन्ती तपस्विनी।
तं मुहूर्तं क्षणं वेलां दिवसं च युयोज ह॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब तपस्वी राजकुमारी ने नारद जी के वचनों को स्मरण करके शुभ घड़ी, मुहूर्त, समय और दिन की गणना शुरू कर दी।
 
Then the ascetic princess, remembering the words of Narada ji, started calculating the auspicious moment, moment, time and day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)