श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.297.67 
विश्रान्तोऽसि महाभाग विनिद्रश्च नृपात्मज।
यदि शक्यं समुत्तिष्ठ विगाढां पश्य शर्वरीम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
हे महान! आपने विश्राम कर लिया। राजकुमार! अब आपकी नींद भी टूट गई है। यदि आपमें शक्ति है, तो उठ जाइए; देखिए, रात बहुत अँधेरी हो गई है।
 
O great one! You have rested. Prince! Now your sleep has also broken. If you have the strength, then get up; see, the night has become pitch dark.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)