श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.297.65 
सत्यवानुवाच
सुचिरं बत सुप्तोऽस्मि किमर्थं नावबोधित:।
क्व चासौ पुरुष: श्यामो योऽसौ मां संचकर्ष ह॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
सत्यवान् बोले—प्रिये ! मुझे दुःख है कि मैं इतनी देर तक सोता रहा । तुमने मुझे जगाया क्यों नहीं ? वे काले मनुष्य कहाँ हैं जिन्होंने मुझे खींचा था ॥ 65॥
 
Satyavan said—Dear! I am sorry that I slept for so long. Why did you not wake me up? Where are those dark-skinned men who pulled me?॥ 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)