श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  3.297.64 
संज्ञां च स पुनर्लब्ध्वा सावित्रीमभ्यभाषत।
प्रोष्यागत इव प्रेम्णा पुन: पुनरुदीक्ष्य वै॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सत्यवान् ने पुनः होश में आकर सावित्री की ओर बार-बार प्रेमपूर्वक देखा और उससे इस प्रकार बोला, जैसे कोई परदेश से लौटा हो।
 
Thereafter Satyavan, regaining consciousness, looked at Savitri lovingly again and again and spoke to her like a man returning from a foreign land. 64
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)