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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान
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श्लोक 6
श्लोक
3.297.6
सा समासाद्य सावित्री भर्तारमुपगम्य च।
उत्सङ्गेऽस्य शिर: कृत्वा निषसाद महीतले॥ ६॥
अनुवाद
यह सुनकर सावित्री तुरन्त अपने पति के पास गई, उनका सिर गोद में लेकर जमीन पर बैठ गई।
On hearing this Savitri quickly went to her husband, took his head in her lap and sat down on the ground.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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