यम उवाच
शतं सुतानां बलवीर्यशालिनां
भविष्यति प्रीतिकरं तवाबले।
परिश्रमस्ते न भवन्नृपात्मजे
निवर्त दूरं हि पथस्त्वमागता॥ ४६॥
अनुवाद
यमराज बोले - हे असहाय! तुम्हें बल और पराक्रम से युक्त सौ पुत्र प्राप्त होंगे, जो तुम्हारा सुख बढ़ाएँगे। राजकुमारी! अब तुम लौट जाओ, ताकि थक न जाओ। तुम मार्ग से बहुत दूर आ गई हो।
Yamraj said - O helpless one! You will get hundred sons full of strength and valour; who will increase your happiness. Princess! Now you go back, so that you do not get tired. You have come very far from the path.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥