श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.297.45 
सावित्र्युवाच
ममात्मजं सत्यवतस्तथौरसं
भवेदुभाभ्यामिह यत् कुलोद्वहम्।
शतं सुतानां बलवीर्यशालिना-
मिदं चतुर्थं वरयामि ते वरम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
सावित्री बोली - मेरे और सत्यवान् दोनों के संयोग से सौ पुत्र और हों, जो कुल की वृद्धि करें तथा बल और पराक्रम से सुशोभित हों। यह चौथा वर मैं आपसे माँगती हूँ। 45॥
 
Savitri said – With the union of both me and Satyavan, there should be a hundred more sons who will increase the clan and be adorned with strength and bravery. This is the fourth boon I ask from you. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)