यम उवाच
कुलस्य सन्तानकरं सुवर्चसं
शतं सुतानां पितुरस्तु ते शुभे।
कृतेन कामेन नराधिपात्मजे
निवर्त दूरं हि पथस्त्वमागता॥ ३९॥
अनुवाद
यमराज बोले - शुभ! तुम्हारे सौ तेजस्वी पुत्र होंगे जो तुम्हारे पिता के वंश को आगे बढ़ाएँगे। राजकुमारी! तुम्हारी यह इच्छा भी पूरी हो गई। अब लौट जाओ, तुम मार्ग से बहुत दूर भटक गई हो।
Yamraj said - Shubh! You will have hundred brilliant sons who will carry forward the lineage of your father's family. Princess! This wish of yours has also been fulfilled. Now go back, you have strayed far from the path.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥