vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान
»
श्लोक 22
श्लोक
3.297.22
तपसा गुरुभक्त्या च भर्तु: स्नेहाद् व्रतेन च।
तव चैव प्रसादेन न मे प्रतिहता गति:॥ २२॥
अनुवाद
तप, गुरुभक्ति, पतिप्रेम, व्रतों का पालन और आपकी कृपा से मेरी गति कहीं भी नहीं रुक सकती॥22॥
With penance, devotion to Guru, love for my husband, observance of fasts and your grace, my speed cannot stop anywhere. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×