श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  3.297.111 
मार्कण्डेय उवाच
ब्रुवन्नेवं त्वरायुक्त: सम्प्रायादाश्रमं प्रति॥ १११॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं - ऐसा कहकर सत्यवान् शीघ्रतापूर्वक आश्रम की ओर चल पड़े।
 
Mārkaṇḍeya says: Having said so, Satyavan began walking hastily towards the hermitage. 111.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि पतिव्रतामाहात्म्यपर्वणि सावित्र्युपाख्याने सप्तनवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत पतिव्रतामाहात्म्यपर्वमें सावित्री-उपाख्यानविषयक दो सौ सत्तानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९७॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ११२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)