श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 110-111h
 
 
श्लोक  3.297.110-111h 
पलाशखण्डे चैतस्मिन् पन्था व्यावर्तते द्विधा।
तस्योत्तरेण य: पन्थास्तेन गच्छ त्वरस्व च॥ ११०॥
स्वस्थोऽस्मि बलवानस्मि दिदृक्षु: पितरावुभौ।
 
 
अनुवाद
पलाश के इस जंगल में यह सड़क दो अलग-अलग दिशाओं में मुड़ती है। उत्तर दिशा वाली सड़क पकड़ो और तेज़ी से आगे बढ़ो। अब मैं स्वस्थ, बलवान हूँ और अपने माता-पिता से मिलने के लिए उत्सुक हूँ। 110 1/2।
 
In this forest of Palaash trees, this road turns in two different directions. Take the road that goes towards the north and move quickly. Now I am healthy, strong and eager to see my mother and father. 110 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)