श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.297.1 
मार्कण्डेय उवाच
अथ भार्यासहाय: स फलान्यादाय वीर्यवान्।
कठिनं पूरयामास तत: काष्ठान्यपाटयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं - तत्पश्चात् बलवान सत्यवान ने अपनी पत्नी के साथ फल तोड़कर एक लकड़ी की टोकरी में भर ली और फिर वे लकड़ियाँ काटने लगे॥1॥
 
Markandeya says - Thereafter, the powerful Satyavan along with his wife picked fruits and filled a wooden basket. After that, they started chopping wood.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)