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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 294: सावित्रीका सत्यवान‍्के साथ विवाह करनेका दृढ़ निश्चय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.294.21 
अश्वपतिरुवाच
गुणैरुपेतं सर्वैस्तं भगवन् प्रब्रवीषि मे।
दोषानप्यस्य मे ब्रूहि यदि सन्तीह केचन॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अश्वपति बोले - हे प्रभु! आप उसे सम्पूर्ण गुणों से युक्त बता रहे हैं, यदि उसमें कोई दोष हो तो कृपया उसे भी मुझे बताइए॥21॥
 
Ashwapati said - O Lord! You are describing him as having all the virtues, if he has any faults then please tell me those too. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)