श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.291.65 
तस्मै तद् भरतो राज्यमागतायातिसत्कृतम्।
न्यासं निर्यातयामास युक्त: परमया मुदा॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
तब भरत ने बड़ी प्रसन्नतापूर्वक अयोध्या का राज्य भगवान् राम को लौटा दिया, जिसे उन्होंने बड़े आदर के साथ अपने पास रख लिया था॥65॥
 
Then Bharata very happily returned the kingdom of Ayodhya to Lord Rama who had been kept as a trust by him, with great respect. ॥ 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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