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श्लोक 3.291.44-45h  |
सीता चापि महाभागा वरं हनुमते ददौ॥ ४४॥
रामकीर्त्या समं पुत्र जीवितं ते भविष्यति। |
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| अनुवाद |
| परम सौभाग्यवती सीता ने भी हनुमान को यह वरदान दिया- 'पुत्र! जब तक इस पृथ्वी पर भगवान राम का यश रहेगा, तब तक तुम्हारा जीवन स्थिर रहेगा।॥44 1/2॥ |
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| The extremely fortunate Sita also gave this boon to Hanuman - 'Son! As long as the fame of Lord Rama remains on this earth, your life will remain stable. ॥ 44 1/2 ॥ |
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