श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  3.291.41-42h 
तमुवाच ततो ब्रह्मा देवै: शक्रपुरोगमै:॥ ४१॥
कौसल्यामातरिष्टांस्ते वरानद्य ददानि कान्।
 
 
अनुवाद
यह सब हो जाने के बाद ब्रह्माजी ने इन्द्र आदि देवताओं के साथ मिलकर भगवान राम से कहा - 'कौशल्यानंदन! कहिए, आज मैं आपको कौन-सा वरदान दूँ?'
 
After all this was done, Brahma along with Indra and other gods said to Lord Rama - 'Kausalyanandan! Tell me, which boons should I grant you today?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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