श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  3.291.39-40h 
ततो देवान्नमस्कृत्य सुहृद्भिरभिनन्दित:॥ ३९॥
महेन्द्र इव पौलोम्या भार्यया स समेयिवान्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात श्री रामचन्द्रजी ने देवताओं को नमस्कार किया और अपने मित्रों से सत्कार करके अपनी पत्नी सीता से ऐसे मिले, मानो इन्द्र अपनी पुत्री से मिले हों॥39 1/2॥
 
After that, Shri Ramchandra ji saluted the gods and was greeted by his friends and met his wife Sita, as if Indra had met his daughter. 39 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)