श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.291.37 
राम उवाच
अभिवादये त्वां राजेन्द्र यदि त्वं जनको मम।
गमिष्यामि पुरीं रम्यामयोध्यां शासनात् तव॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी ने कहा - राजन! यदि आप मेरे पिता हैं तो मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आपकी अनुमति से मैं अब सुन्दर अयोध्यापुरी को लौट जाऊँगा।
 
Shri Ramchandraji said - King! If you are my father then I bow to you. With your permission I will now return to the beautiful Ayodhyapuri.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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