श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.291.36 
दशरथ उवाच
प्रीतोऽस्मि वत्स भद्रं ते पिता दशरथोऽस्मि ते।
अनुजानामि राज्यं च प्रशाधि पुरुषोत्तम॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
दशरथ बोले- पुत्र! मैं तुम्हारे पिता दशरथ हूँ, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, तुम्हारा कल्याण हो। पुरुषोत्तम! मैं तुम्हें अब अयोध्या पर राज्य करने की आज्ञा देता हूँ।
 
Dasharath said- Son! I am your father Dasharath, I am very pleased with you, may you prosper. Purushottama! I command you to now rule Ayodhya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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