श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.291.33 
वधार्थमात्मनस्तेन हृता सीता दुरात्मना।
नलकूबरशापेन रक्षा चास्या: कृता मया॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट रावण ने तो केवल अपनी हत्या के लिए ही सीता का अपहरण किया था। मैंने नलकूबर के शाप से सीता की रक्षा का प्रबंध किया था। 33.
 
The evil-minded Ravana had kidnapped Sita only to kill himself. I had arranged for Sita's protection by the curse of Nalakubar. 33.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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