vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना
»
श्लोक 32
श्लोक
3.291.32
अवध्य: सर्वभूतानां मत्प्रसादात् पुराभवत्।
कस्माच्चित् कारणात् पाप: कञ्चित् कालमुपेक्षित:॥ ३२॥
अनुवाद
पूर्वकाल में मेरी कृपा से यह समस्त प्राणियों के लिए अमोघ हो गया था। किसी कारणवश इस पापी की कुछ समय तक उपेक्षा हुई। 32.
In the past, due to my grace, he had become inviolable for all living beings. Due to some reason, this sinner was ignored for some time. 32.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd