श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.291.23 
अन्तश्चरति भूतानां मातरिश्वा सदागति:।
स मे विमुञ्चतु प्राणान् यदि पापं चराम्यहम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘निरंतर गतिशील वायुदेवता (पवनदेवता) समस्त प्राणियों के भीतर विचरण करते हैं। यदि मैंने कोई पाप किया हो, तो वायुदेवता मेरे प्राण ले लें।॥23॥
 
‘The constantly moving Vayu Devta (Lord of Wind) moves within all living beings. If I have committed any sin, then the Vayu Devta may take away my life.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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