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श्लोक 3.291.23  |
अन्तश्चरति भूतानां मातरिश्वा सदागति:।
स मे विमुञ्चतु प्राणान् यदि पापं चराम्यहम्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| ‘निरंतर गतिशील वायुदेवता (पवनदेवता) समस्त प्राणियों के भीतर विचरण करते हैं। यदि मैंने कोई पाप किया हो, तो वायुदेवता मेरे प्राण ले लें।॥23॥ |
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| ‘The constantly moving Vayu Devta (Lord of Wind) moves within all living beings. If I have committed any sin, then the Vayu Devta may take away my life.॥ 23॥ |
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