श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.291.22 
राजपुत्र न ते दोषं करोमि विदिता हि ते।
गति: स्त्रीणां नराणां च शृणु चेदं वचो मम॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'राजकुमार! मैं तुम्हें दोष नहीं देती, क्योंकि तुम अच्छी तरह जानते हो कि स्त्री-पुरुष का भाग्य क्या होता है। बस मेरी बात सुनो।'
 
‘Prince! I do not blame you, because you know very well what is the fate of men and women. Just listen to me.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd