श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.291.21 
तत उत्थाय वैदेही तेषां मध्ये यशस्विनी।
उवाच वाक्यं कल्याणी रामं पृथुलवक्षसम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब उन सबके बीच में खड़ी हुई शुभ और महिमामयी सीताजी चौड़ी छाती वाले भगवान श्री राम से इस प्रकार बोलीं-॥21॥
 
Then standing in the midst of all of them, Sita, the auspicious and glorious one, spoke to the broad-chested Lord Shri Ram thus -॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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