श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.291.17 
ततो देवो विशुद्धात्मा विमानेन चतुर्मुख:।
पद्मयोनिर्जगत्स्रष्टा दर्शयामास राघवम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसी समय कमल-नेत्र वाले जगत् रचयिता चतुर्मुख ब्रह्माजी शुद्ध हृदय से विमान द्वारा वहाँ आये और श्री रामचन्द्रजी को दर्शन दिए॥17॥
 
At the same time, the lotus-eyed world creator, four-faced Brahmaji, with a pure heart, came there by plane and gave darshan to Shri Ramchandraji. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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