vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना
»
श्लोक 17
श्लोक
3.291.17
ततो देवो विशुद्धात्मा विमानेन चतुर्मुख:।
पद्मयोनिर्जगत्स्रष्टा दर्शयामास राघवम्॥ १७॥
अनुवाद
उसी समय कमल-नेत्र वाले जगत् रचयिता चतुर्मुख ब्रह्माजी शुद्ध हृदय से विमान द्वारा वहाँ आये और श्री रामचन्द्रजी को दर्शन दिए॥17॥
At the same time, the lotus-eyed world creator, four-faced Brahmaji, with a pure heart, came there by plane and gave darshan to Shri Ramchandraji. 17॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd