श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 291: श्रीरामका सीताके प्रति संदेह, देवताओंद्वारा सीताकी शुद्धिका समर्थन, श्रीरामका दल-बलसहित लंकासे प्रस्थान एवं किष्किन्धा होते हुए अयोध्यामें पहुँचकर भरतसे मिलना तथा राज्यपर अभिषिक्त होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.291.1 
मार्कण्डेय उवाच
स हत्वा रावणं क्षुद्रं राक्षसेन्द्रं सुरद्विषम्।
बभूव हृष्ट: ससुहृद् राम: सौमित्रिणा सह॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं - युधिष्ठिर! इस प्रकार दुष्ट राक्षसराज रावण का वध करके भगवान् श्री राम अपने मित्रों और लक्ष्मण सहित अत्यन्त प्रसन्न हुए॥1॥
 
Markandeyaji says – Yudhishthir! In this way, Lord Shri Ram along with his friends and Lakshman became very happy after killing the wicked demon king Ravana. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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